Wednesday, February 13, 2013

मुझे पता है
मेरे रास्ते बदल लेने का खौफ़
तुम्हें पलटने पर मजबूर कर देगा
वो बेचैनी...वो जलन...वो कशमकश
तुम्हारे इस बर्फ़ से दिल को पिघला देगी
लेकिन...
तुम पलटोगे
ज़रूर पलटोगे...


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मुझे पता है
मेरे रास्ते बदल लेने का खौफ़
तुम्हें पलटने पर मज़बूर कर देगा
मैं जानती हूँ
वो बेचैनी...वो जलन...वो कशमकश
तुम्हारे इस बर्फ़ से दिल को पिघला देगी
इसलिए यकीं है
तुम पलटोगे ज़रूर 'मेरी ख़ातिर'
और अपनी जिदें छोड़,
तुम्हें खो देने की भूल करने से मुझे बचा लोगे.
:))
खुद को अपनी नज़रों में
इतनी ऊंची मीनार पर रखते हैं हम
कि कभी जो मुंह के बल गिरे वहां से तो
इतनी दूर तक फैलती हैं उसकी किरचें कि
समेटना नामुमकिन

किन्हीं कमज़ोर पलों मे हुई नादानियां
हर वक़्त बेचैन रखतीं हैं दिल
और जीने नहीं देतीं
कोई आपको बुरा समझे
बिल्कुल फर्क नहीं पड़ता
जितना खुद को समझने से पड़ता है
बचपन में सिखाई गई बातें
बिना समझे ही मानते रहना
कई बार बेहतर होता है
नादानियों के लिहाज से...

हम चैन से जी रहे होते हैं
खुद को अच्छा...
बहुत अच्छा समझते हुए

Rose Day ...

अभी-अभी देखा कि आज Rose Day है -

आँगन में खिले गुलाब से लिपटकर आती हवा गुलाबी
मन में खिल गए हैं अब इतने गुलाब कि
तुम्हारी याद से हो गई हैं आँखें पुर'आब
गुलाबी मौसम की....गुलाबी शाम में
कितनी तरह से खिलते हैं तेरी
यादों के गुलाब...

( आख़िर प्रिय फूल भी तो है )
यादों के झरोखे से
जो निकल के आतीं हैं तस्वीरें
उनमें कहीं तुम हो
लगता तो है कि तुम हो
क्या सचमुच हो ??

( नींद की आगोश में जाने से ठीक पहले...)

आज दिल पे कोई ज़ोर चलता नहीं .....

नाम है, ख़याल है कि ये याद है तुम्‍हारी....

मन क्‍यों भीग-भीग जाता है तुम्‍हें सोचते ही...

पिछली बार क्‍या हुआ था...

किसी बात पर हमने

एक दूसरे का कहीं दिल तो नहीं दुखाया था...

( आज दिल पे कोई ज़ोर चलता नहीं ......)
रात भर तो तुमसे नाराज़ रहा
सुबह होते ही सुलह पे आमादा है

नाफ़रमान...बे-ग़ैरत दिल...हुंह...♥

Friday, January 11, 2013

इक ख़ामोश चीख...

लगभग चीखती-सी
दिल को चीरती हुई
तुम्हारी वो अनकही
सुनी मैंने अभी-अभी
लेकिन जाने कैसा शोर बरपा है
इन दिनों हर तरफ ?
भीतर-बाहर का मौसम बड़ा सर्द है
कि तुम्हारी अबोली बातें
न सुन सका दिल
उफ्फ्फ़...कितने उदास
कितने हताश हुए होगे तुम
चीखने से ठीक पहले
कितना तड़पे होगे
जानते हो
अनजाने ही हुआ सब
कभी होता भी तो है कि
हम सुनने की हालत में
लिसनिंग मोड में नहीं होते
अब सुन ली है दिल ने
वो अनकही सदा तुम्हारी
अबोले की गलतफहमियां नहीं होंगी
इतना तो यकीन है ही
और यूँ भी अस्फुट स्वरों में
बिना कुछ कहे
जैसे दूर बैठे बतियाते हैं
हमेशा बतियाते रहेंगे हम !