Sunday, March 24, 2013

चलो मान जाओ ना...

तुम्हें हक़ है
कि तुम दिल दुखाओ
और दुखाओ
आज तुम न मानना
तब तक
जब तक तुम्हें मनाते-मनाते
मैं न उदास हो जाऊं
रुलाई न फूट पड़े मेरी

उफ्फ् ये नाउम्मीदी
खुद पे इतना भी ऐतबार नहीं
कि कह सकूं कि
अब गलती नहीं होगी
चलो यूँ मान लो
कि अब बहुत दिनों बाद होगी
जैसे आश्विन के बाद आता है सावन

Friday, March 15, 2013

काश मैं तुम्हारी बेटी होती...

काश मैं तुम्हारी बेटी होती
तो तुम
मुझे भी फ्रॉक पहनाते
चोटी बनाते
गोद में उठाते
मेरी अठखेलियों में खो जाते
मेरी नाराज़गियों पर
मुझे फुसलाते...बहलाते

अभी-अभी
मेरी आवाज सुनकर
माथे पे बिखरे बालों को
जिस तरह कानों के पीछे संवारा तुमने
और फिर अपने ही हाथों को चूम लिया
यकीन मानों इस इक पल में
ये ख्वाब बिल्कुल ही सच सा लगा

Tuesday, February 26, 2013

दुआएं...

टूटी हुई पलक में
लपेट कर दुआएं
उड़ा दीं
टकराके अर्श से
कहीं लौट न आएं
भेजी हुई दुआएं
तुम जो कह दो तो
कुबूल हो जाएँ
मुसलसल गुज़रती ज़िन्दगी
और रफ़्तार उसकी
यादों में उभरते हैं कभी-कभी
अतीत के कुछ मिटे मिटे से चित्र
एक काफिला सा रुकता है आके
आरज़ूओं के मरुस्थल में
शायद अनजाने ही
इन धुंधली मिटती यादों के बीच
कोई ख्‍वाहिश हमेशा
अपनी जगह कायम रहती है ताउम्र...
कुदरत की प्यार भरी नज़र ने
धरती के गालों पे सुर्खियां सजाई
सूरज ने झाँक कर देखना चाहा
समंदर शरमाया
यूँ पलकें न झुकाओ
कि भोर होने के ठीक पहले
सांझ ढलती सी लगे
पलकें उठाओ
सूरज माथे पे सजाओ
कि दिन निकल आया है

......सु-प्रभात!:)

झूठ...

काश!
कभी झूठमूठ ही
कह दो

यकीन मानो
उम्र भर को काफी होगा
आखिर ध्वनि का भी
अपना विज्ञान है
और यकीन का भी

वो झूठ
तुम्हारी आवाज़ में सच ही लगेगा
जब गूंजा करेगा कानों में...
इतनी शिद्दत की बग़ावत है मेरे जज़्बों में ,
हम किसी रोज़ मुहब्बत से न मुकर जाएं !:)