यूँ पलकें मूँद लेने से नींद नहीं आती....सोते वो लोग हैं जिनके लिए कोई जाग रहा हो...शुभ-रात्रि !:)
Tuesday, May 21, 2013
जुगनू जो कहते हैं वृक्षों से लिपट कर ,
गाँव के सुनसान रास्तों को गले लगा जो कहती है चांदनी ,
टिमटिमाते तारों से जो कहता है आकाश...
उसे समझने के लिए लिए किसी भाषा ज्ञान की ज़रुरत कहाँ है भला??
मुझे नही आती आकाश की भाषा ...लेकिन,
दिल महसूस करता है उस अनजानी भाषा में कही हुई हर बात...
(मित्र नित्यानंद जी की कविता पर टिप्पणी )
गाँव के सुनसान रास्तों को गले लगा जो कहती है चांदनी ,
टिमटिमाते तारों से जो कहता है आकाश...
उसे समझने के लिए लिए किसी भाषा ज्ञान की ज़रुरत कहाँ है भला??
मुझे नही आती आकाश की भाषा ...लेकिन,
दिल महसूस करता है उस अनजानी भाषा में कही हुई हर बात...
(मित्र नित्यानंद जी की कविता पर टिप्पणी )
कितनी
दफ़े हुआ ऐसा कि तुम नहीं मिले काफी दिनों तक ....हम यादों को हाथ पकड़ कर
बुला लाते पास अपने ...मन पूछा करता मिलोगे तो क्या क्या बताएँगे
तुम्हें ...?
याद है हमें ....तुम भीगे मन से किस तरह सुना करते थे बातें मन की ...जो रो रो कर हम सुनाया करते ...
अबकी मिलोगे तो ....तो कोई ऐसी बात सुनाएंगे जिसे सुनकर तुम मुस्कुराओ ....और बस मुस्कुराते जाओ ...और हम यूँ ही निहारते हुए तुम्हें....................... .............................. .........हह..
( * लिखी जा रही कहानी का अंश )
याद है हमें ....तुम भीगे मन से किस तरह सुना करते थे बातें मन की ...जो रो रो कर हम सुनाया करते ...
अबकी मिलोगे तो ....तो कोई ऐसी बात सुनाएंगे जिसे सुनकर तुम मुस्कुराओ ....और बस मुस्कुराते जाओ ...और हम यूँ ही निहारते हुए तुम्हें.......................
( * लिखी जा रही कहानी का अंश )
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