Tuesday, May 21, 2013

- आज भी रखे हैं पछतावे की आलमारी में....इक दो वादे जो दोनों से निबाहे न गए.....

- तुझे औरों की भी ज़रुरत है.....मुझे एहसास क्यूँ नहीं होता....

चले आओ कि फिर से अजनबी होकर मिलें ,
तुम मेरा नाम पूछो , मैं तुम्हारा हाल पूछूं !:)


- यूँ तंग ना किया करो
यह सब कहने के लिए है
जानते हो तुम भी
जानती हूँ मैं भी..

भला तुमसे तंग हुई हूँ मैं कभी..?

साँसें बस में नहीं रहीं
तो बस
यूं ही कह दिया..!!



'' नींदों के एहसान उठाए ,
फिर भी तेरे ख़्वाब न आए ''




' दर्द के मुरीद थे हम....मुहब्बत न करते तो क्या करते...'
रखकर मेरी आँखों पे अपने हाथ.....इक ख्वाब का महूरत कर दो ......शब-ब-ख़ैर !:)
कल रात जब सितारे उड़ रहे थे हवा के साथ......हमने भी इक बात कर ली खुदा के साथ !:))
कोई रूठता ही इसलिए है ना कि मना ले कोई ??
लेकिन, कोई इसलिए ही रूठा हो कि मनाता ही नहीं कोई...तो ??

'' सौ बार अगर तुम रूठ गए, हम तुमको मना ही लेते थे ,
इक बार अगर हम रूठ गए,तुम हमको मनाना क्या जानों ''
इस दिल का उफ़्फ़्फ़्फ़्फ़ अब मैं क्या करूँ......??

चेहरे पे जिसके हैं सभी झूठ की तहरीरें.....दिल उसी शक्स के वादों से बहलता क्यूँ है....??

( मेरा दिल कहे कहीं ये न हो....नहीं ये न हो....नहीं ये न हो....)
प्रेम में डूबी लड़कियों के गले पर स्पर्श करोगे, तो पाओगे, अंदर कांटे भरे हैं। गुलाब के डंठल की तरह। ये रुलाहट को रोकने की कोशिश में उगने वाले कांटे होते हैं।

- गीत चतुर्वेदी -


--और प्रेम में डूबी लड़कियों के अनाहत पर स्पर्श करोगे, तो पाओगे की अन्दर पत्थर भरे हैं जो दिल में करवट लेती टीस को भीतर ही दबाने के लिए होते हैं...
उनके तगाफुल पे न कर शिकवा ऐ दिल......दोस्तों को बड़े इख्तियारात होते हैं......